Short History

संक्षिप्त परिचय (Short History)

बलिया जनपद मुख्यालय से लगभग 65 कि०मी० दूर बिल्थरा रोड, पनपुर गुलौरा मार्ग पर स्थित यह महाविद्यालय छात्राओं के लिये जनपद का दूसरा स्नातक महाविद्यालय है | इस महाविद्यालय की स्थापना सन 1994 में गरीबों के मसीहा, जनभावना के नायक, सामाजिक एकता के प्रतीक, सामाजिक न्याय के पोषक, मृदुभाषी, लौहपुरुष, पूर्व मुख्य मन्त्री उत्तर प्रदेश सरकार तथा भारत सरकार के पूर्व रक्षामंत्री माननीय मुलायम सिंह यादव जी के कर कमलों द्वारा हुई थी | यह महाविद्यालय खोलकर परम पूजनीय सन्त 'शिरोमणि स्वामी रामनारायणाचार्य जी महाराज तथा जनता के मसीहा श्रद्धेय माननीय स्व० श्री शारदानन्द ' अंचल जी पूर्व मन्त्री उत्तर प्रदेश सरकार के अथक प्रयास एवं सहयोग से कभी बेचिरागी मौजा कहे जाने वाले चन्दौल ग्राम सभा क्षेत्र में, ज्ञान का दीप प्रज्वलित करके इस महान नेता ने इस अंचल को ही नही बल्कि जनपद बलिया, मऊ तथा देवरिया में प्रकाश बिखेरा है | यह महाविद्यालय 'दानवीर' कर्ण जैसे दानी श्री बब्बन यादव का सदैव ऋणी रहेगा जिन्होंने अपनी बहुमूल्य भूमि देकर इस महाविद्यालय की स्थापना करवायी | साथ ही यह महाविद्यालय अपने प्रबन्ध समिति का सदैव आभारी है जो इस महाविद्यालय की समस्याओं को सुनने तथा दूर करने के लिए सदैव तत्पर तथा मार्गदर्शक का कार्य करता रहता है |जिसमें सरस सलिल मृदुभाषी युवा प्रबन्धक महोदय श्री बब्बन यादव जी का कर्तव्य एव योगदान सदैव सराहनीय रहता है | इसके साथ ही साथ यह महाविद्यालय परिवार विलक्षण व्यक्तित्व के धनी इस महाविद्यालय के मसीहा तथा महाविद्यालय के भीष्मपितामह श्रद्धेय कोषाध्यक्ष महोदय श्री राजेन्द्र प्रसाद यादव जी के योगदान को कभी भी नही भुला सकता है |
जो इस महाविद्यालय की विकट समस्याओं को सुलझाने में धैर्य का परिचय देते हुए समस्याओं का निराकरण तीव्र गति से कर देते है | जिससे यह महाविद्यालय प्रगति के पथ बढ़ता जा रहा है | इसके साथ ही मुबारकपुर ग्रामसभा के पूर्व ग्राम प्रधान श्री जनार्दन यादव के सराहनीय कार्यों को कभी नही भुला जा सकता है | जिन्होंने इस महाविद्यालय की एक-एक ईट को रखने के लिए अपने जीवन को ही समर्पित कर रखा है | साथ ही में यह भी कहना नही भूल सकती हूँ कि इस महाविद्यालय पर इस क्षेत्र की प्यारी-प्यारी जनता का स्नेह और प्यार बराबर बना रहता है | जो भी प्राधिकृत नियंत्रक इस महाविद्यालय का दायित्व सम्भाले हैं उन्होंने इस महाविद्यालय के समृद्धि में अपना सबसे बड़ा योगदान दिया है | इसी का परिणाम हैं कि इस महाविद्यालय को बनाने एक वर्ष बाद ही वर्ष 1995-96 में शासन द्वारा मान्यता प्राप्त हो गयी है | काशी विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति की अनुकम्पा इस महाविद्यालय पर विशेष रूप से है | जिसका परिणाम है कि महाविद्यालय की विद्वान प्रध्यापिकायें बड़े मनोयोग से अपने छात्राओं को शिक्षा देती हैं | जिनका परिश्रम लगन एवं योगदान महाविद्यालय के योगदान में कम नही कहा जा सकता है |
इस महाविद्यालय के कर्मचारी भी समर्पित भाव से महाविद्यालय के योगदान में लगे हैं | मैं अपने पूर्व एवं वर्तमान छात्राओं के योगदान को कैसे भुला सकती हूँ जो इस महाविद्यालय में लगन पूर्वक अध्ययन एवं प्रशासन के साथ सहयोग करती है तथा प्राध्यापिकाओं को सदा सम्मान देती है | जिसमें सरस सलिल मृदुभाषी युवा प्रबन्धक महोदय श्री बब्बन यादव जी का कर्तव्य एव योगदान सदैव सराहनीय रहता है | इसके साथ ही साथ यह महाविद्यालय परिवार विलक्षण व्यक्तित्व के धनी इस महाविद्यालय के मसीहा तथा महाविद्यालय के भीष्मपितामह श्रद्धेय कोषाध्यक्ष महोदय श्री राजेन्द्र प्रसाद यादव जी के योगदान को कभी भी नही भुला सकता है |
जो इस महाविद्यालय की विकट समस्याओं को सुलझाने में धैर्य का परिचय देते हुए समस्याओं का निराकरण तीव्र गति से कर देते है | जिससे यह महाविद्यालय प्रगति के पथ बढ़ता जा रहा है | इसके साथ ही मुबारकपुर ग्रामसभा के पूर्व ग्राम प्रधान श्री जनार्दन यादव के सराहनीय कार्यों को कभी नही भुला जा सकता है | जिन्होंने इस महाविद्यालय की एक-एक ईट को रखने के लिए अपने जीवन को ही समर्पित कर रखा है | साथ ही में यह भी कहना नही भूल सकती हूँ कि इस महाविद्यालय पर इस क्षेत्र की प्यारी-प्यारी जनता का स्नेह और प्यार बराबर बना रहता है |
जो भी प्राधिकृत नियंत्रक इस महाविद्यालय का दायित्व सम्भाले हैं उन्होंने इस महाविद्यालय के समृद्धि में अपना सबसे बड़ा योगदान दिया है | इसी का परिणाम हैं कि इस महाविद्यालय को बनाने एक वर्ष बाद ही वर्ष 1995-96 में शासन द्वारा मान्यता प्राप्त हो गयी है | काशी विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति की अनुकम्पा इस महाविद्यालय पर विशेष रूप से है | जिसका परिणाम है कि महाविद्यालय की विद्वान प्रध्यापिकायें बड़े मनोयोग से अपने छात्राओं को शिक्षा देती हैं | जिनका परिश्रम लगन एवं योगदान महाविद्यालय के योगदान में कम नही कहा जा सकता है |
इस महाविद्यालय के कर्मचारी भी समर्पित भाव से महाविद्यालय के योगदान में लगे हैं | मैं अपने पूर्व एवं वर्तमान छात्राओं के योगदान को कैसे भुला सकती हूँ जो इस महाविद्यालय में लगन पूर्वक अध्ययन एवं प्रशासन के साथ सहयोग करती है तथा प्राध्यापिकाओं को सदा सम्मान देती है |